Showing posts with label Photo. Show all posts
Showing posts with label Photo. Show all posts

कविता केन्द्रित विमर्श 'माटी के मीत' की आयोजन रिपोर्ट


शब्दों की बाजीगरी और तुकबंदी असली कविता नहीं है -डॉ सत्यनारायण व्यास

चितौडगढ़ 22 अप्रैल,2013 

''अच्छी कविता सुनने और सुनाने का वातावरण बनाना ज़रूरी है।सहृदय पाठक और यथार्थ आधारित कविता के बीच गहरा रिश्ता होना चाहिए लेकिन इसके लिए कवियों को छंद मुक्त कविता लिखते हुए भी उसकी आंतरिक लय और सम्प्रेषणीयता के गुण को बनाए रखना होगा।''

ये विचार वरिष्ठ समालोचक डॉ सत्यनारायण व्यास ने चितौडगढ़ में साहित्य और संस्कृति की मासिक ई पत्रिका अपनी माटी के आयोजन माटी के मीत के दौरान अपने अध्यक्षीय उदबोधन में व्यक्त किये। ये आयोजन इक्कीस अप्रैल को सेन्ट्रल अकादमी सीनियर सेकंडरी स्कूल में संपन्न हुआ।डॉ व्यास कहा कि शब्दों की बाजीगरी और तुकबंदी असली कविता नहीं है इसीलिए कवियों और कुकवियों के बीच के फरक को स्पष्ट किया जाना अब बेहद ज़रूरी हो गया है।

विशिष्ट अतिथि के तौर पर बोलते हुए कोटा से आये प्रख्यात कवि अम्बिकादत्त ने कहा कि मौजूदा समाज में घटती जा रही रचनात्मकता को बचाए रखने का दायित्व कवियों का है।उन्होंने समाज में कविता की भूमिका बताते हुए कहा कि कविता असम्भव की दुनिया में संभव का दर्शन कराती है।

कार्यक्रम के पहले चरण में सवाईमाधोपुर से आये राजस्थान के प्रतिबद्ध कवि विनोद पदरज ने बेटी के हाथ की रोटी, शिशिर की शर्वरी, दादी माँ, उम्र आदि शीर्षक कविताओं का प्रभावपूर्ण पाठ किया।आयोजन में शामिल अजमेर से आये दूसरे अतिथि कवि अनंत भटनागर ने झुकी मुठ्ठी, मोटरसाइकिल चलाती लड़की ,मुझे फांसी दो और मोबाइल पर प्रेम कवितायेँ पढ़ी। कार्यक्रम के दूसरे चरण में क्रमश: डॉ रेणु व्यास ने विनोद पदरज की कविता पर और डॉ राजेन्द्र सिंघवी ने अनंत भटनागर की कविता पर समीक्षालेख पढ़े।इससे पूर्व डॉ कनक जैन ने समकालीन कविता में मौजूद यथार्थ की छवियों से श्रोताओं को परिचित कराते हुए अपने वक्तव्य में नव उदारवाद और भू-मंडलीकरण से जूझती हिन्दी कविता के संघर्ष को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के सर्वाधिक रोचक चरण रचनाकार-श्रोता संवाद में कॉलेज व्याख्याता डॉ नरेन्द्र गुप्ता, उदघोषिका भावना शर्मा, अध्यापक नंदकिशोर निर्झर, बाबू खाँ मंसूरी, सतीश मिश्रा ने हिन्दी भाषा की वर्तमान अवस्था और हिन्दी कविता को लेकर प्रश्न किये जिससे विचारोत्तेजक बहस का वातावरण बना।इस कविता कार्यशाला में डॉ भारतेंदु गौतम, भंवर लाल सिसोदिया, लक्ष्मण व्यास, कृष्णा सिन्हा, अमृत वाणी, आर एन डाड, हेमंत शर्मा, सुमित्रा चौधरी, डालर सोनी,चंद्रकांता व्यास, रेखा जैन, कमलेश, रजनीश दाधीच, शोधार्थी प्रवीण कुमार जोशी, अफसाना बानो, महेंद्र खेरारू, हरीश लड्ढा, भारत व्यास,हरीश खत्री, अखिलेश औदिच्य आदि ने अंश ग्रहण किया।

आरम्भ में प्रयास के सचिव डॉ नरेन्द्र गुप्ता, नटवर त्रिपाठी, एम् एल डाकोत, विकास अग्रवाल ने आमंत्रित अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया। इस अवसर पर सत्यनारायण जोशी ने फड़ चित्रकृतियां भी भेंट की।कार्यक्रम का संचालन राजेश चौधरी और माणिक ने किया।

घर में कविता संगोष्ठी फोटो रिपोर्ट

ये आयोजन नौ मार्च,2013 को हुआ ,बाकी जानकारी जल्दी ही