1. ‘सलाखें’ (कहानी-संग्रह) एक विवेचन, आंचलिक लेखक सम्मेलन, डूंगरपुर, 20.04.1984 ई0,
2. समकालीन लेखन और लेखकीय संकट, संगोष्ठी, कांकरोली, 05.11.1988,
3. फिर एक क्रौंच-वध: यानी आनन्द कुरेशी की कथा, जनयात्रा, जयपुर, 12.03.1992,
4. ‘कनुप्रिया’ के कृष्ण, मीरा राष्ट्रीय उपनिषद्, 14.10.1997 ई0, चित्तौड़गढ़,
5. सांस्कृतिक प्रदूषण और साहित्यि-संदर्भ: इलेक्ट्रोनिक मीडिया, लोकशासन, जयपुर, 1997 ई0,
6. पन्त के काव्य में नव-चेतना, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, वल्लभ विद्यानगर, गुजरात की राष्ट्रीय संगोष्ठी, 1999 ई0,
7. भारतीय भाषा-विज्ञान और भर्तृहरि (‘वाक्यपदीयम्’ के विशेष संदर्भ में ), महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, अजमेर की राष्ट्रीय संगोष्ठी 25-27 सितम्बर 2000 ई0,
8. राष्ट्रीय चेतना के विकास में उच्च शिक्षा की भूमिका, रुक्टा प्रांतीय अधिवेशन, सीकर (राज.), 26-27 मार्च 2000 ई0,
9. वेदांत और कबीर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला द्वारा आयोजित कबीर-केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी, अप्रेल 2000 ई0,
10. समकालीन नारी-चेतना और कविता, दलित साहित्य अकादमी, उज्जैन, सितम्बर 2001 ई0,
11. मीरा बाई के काव्य की प्रासंगिकता, मीरा पंचशती समारोह, चेन्नई, मदुरई, कन्याकुमारी व तिरुअनन्तपुरम् दिनांक 26,28,30 नवम्बर और 02 दिसम्बर 2004 ई0,
12. लोक जीवन में मीरा, हिन्दी विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर की राष्ट्रीय संगोष्ठी, 28-29 दिसम्बर 2004 ई0,
13. राजस्थानी भाषा अर लोक-साहित्य माँय संस्कृति री सुवास, राजस्थान साहित्यकार सम्मेलन, भीलवाड़ा (राज.), अक्टूबर 2004 ई0,
14. उत्तर-संरचनावाद और कविता के पाठ का संकट, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा, 28 मार्च 2008 ई0,
15. जथारथ री लुकमींचणी: आज रो कथा-साहित्य, साहित्य अकादमी, दिल्ली की राजस्थानी कथा-साहित्य पर उदयपुर में संगोष्ठी, 2008 ई0।

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